एक दिन चाँद से की थी गुजारिश हमने, मेरी "श्याम से करवाओ मुलाकात कभी...
चाँद भी मुस्कुरा कर टाल गया, कहा मत कर शर्मिंदा अभी...
तेरे "श्याम" को देख कर फिर ना कभी चमक पाऊंगा, रौशनी तेरे "श्याम की है कुछ अलग, शायद मैं खुद ही खो जाऊंगा...
|| जय श्री श्याम ||
चाँद भी मुस्कुरा कर टाल गया, कहा मत कर शर्मिंदा अभी...
तेरे "श्याम" को देख कर फिर ना कभी चमक पाऊंगा, रौशनी तेरे "श्याम की है कुछ अलग, शायद मैं खुद ही खो जाऊंगा...
|| जय श्री श्याम ||
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें